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भारत ने घरेलू उद्योगों के लिए बड़े वैश्विक बाजार खोलने के लिए रक्षा निर्यात के नियमों में दी ढील
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भारत ने अपने रक्षा निर्यात को आसान बनाने के लिए भारतीय रक्षा निर्माताओं के लिए प्रक्रिया से जुड़े नियमों में ढील दी है जिससे निर्यातकों के सामने आने वाली मुश्किलें कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ी है।
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रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, भारत ने अपने रक्षा निर्यात को आसान बनाने के लिए भारतीय रक्षा निर्माताओं के लिए प्रक्रिया से जुड़े नियमों में ढील दी है, जिससे निर्यातकों के सामने आने वाली मुश्किलें कम हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ी है।नियमों के मुताबिक, अब ज्यादातर देशों में गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श लेने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं। बयान के मुताबिक, भारतीय रक्षा मंत्रालय के उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सामान्य खुले निर्यात लाइसेंस (OGEL) ढांचे को आसान बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।सरकार ने कहा कि इन सुधारों से खास तौर पर भारतीय रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों को भी फायदा होगा, क्योंकि इससे उन्हें बड़े वैश्विक बाजारों तक पहुंचने और बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत कम करने में मदद मिलेगी।रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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भारत ने घरेलू उद्योगों के लिए बड़े वैश्विक बाजार खोलने के लिए रक्षा निर्यात के नियमों में दी ढील
16:36 28.08.2026 (अपडेटेड: 16:45 28.08.2026) भारतीय सरकार देश को एक भरोसेमंद वैश्विक रक्षा विनिर्माण और निर्यात साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, भारत ने अपने रक्षा निर्यात को आसान बनाने के लिए भारतीय रक्षा निर्माताओं के लिए प्रक्रिया से जुड़े नियमों में ढील दी है, जिससे निर्यातकों के सामने आने वाली मुश्किलें कम हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ी है।
नियमों के मुताबिक, अब ज्यादातर देशों में गैर-घातक
रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श लेने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।
बयान में कहा गया, "अंतरराष्ट्रीय टेंडर और प्रदर्शनियों के लिए सभी सामानों के निर्यात में भी हितधारकों से परामर्श लेने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। इससे भारतीय कंपनियां अपने उत्पाद दिखा सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का तेजी से फायदा उठा सकेंगी।"
बयान के मुताबिक, भारतीय रक्षा मंत्रालय के उत्पादन विभाग ने
रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सामान्य खुले निर्यात लाइसेंस (OGEL) ढांचे को आसान बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।
मंत्रालय ने बताया, "सामान्य खुले निर्यात लाइसेंस (OGEL) ढांचे को भी आसान बनाया गया है। तीन मौजूदा SOPs को मिलाकर एक यूनिफाइड OGEL SOP बनाई गई है, जबकि इसकी वैधता को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इसके साथ-साथ कवरेज को 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों में कर दिया गया है। हालांकि, उन देशों को इससे बाहर रखा गया है जो संवेदनशील हैं या जिन पर UN द्वारा हथियार प्रतिबंध लगाए गए हैं।"
सरकार ने कहा कि इन सुधारों से खास तौर पर
भारतीय रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों को भी फायदा होगा, क्योंकि इससे उन्हें बड़े वैश्विक बाजारों तक पहुंचने और बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत कम करने में मदद मिलेगी।
रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।