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भारतीय रक्षा उत्पादन में उछाल, निर्यात भी बढ़ा
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भारत के रक्षा उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर... 17.06.2026, Sputnik भारत
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रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि इस उत्पादन में सरकार से जुड़े उपक्रमों की 76 प्रतिशत और निजी क्षेत्र के उपक्रमों की 24 प्रतिशत भागीदारी है।रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के प्रयास 2014 के तुरंत बाद ही प्रारंभ हो गए थे लेकिन 2020 में सैनिक साजोसामान खरीदने के लिए बनाए गए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के नियमों में संसोधन के बाद इसमें गति आई। इन संसोधनों ने निजी क्षेत्रों को सरकारी उपक्रमों के साथ साझेदारी के नए रास्ते खोल दिए साथ ही निजी क्षेत्र के उद्योग अब अपने उत्पाद निर्यात भी करने के लिए स्वतंत्र हो गए।स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने उन उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रों की सूची जारी करनी प्रारंभ की जिन्हें अब केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग से ही खरीदा जा सकता था जिसमें अब लगभग 5500 आइटम हो चुके हैं। इससे सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ही तरह के रक्षा उद्योग को भारी लाभ हुआ।केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग से ही खरीदे जाने वाले उत्पादों में पोत, विमान, तोपों जैसे बड़े और जटिल उपकरण भी हैं। भारतीय नौसेना के लिए रूस से बनकर आए तलवार क्लास के दो युद्धपोतों के बाद अब कोई भी युद्धपोत विदेश से नहीं खरीदा जाएगा। नौसेना के अलग-अलग शिपयार्डों में बने 5 से अधिक पोत केवल अगले एक महीने में ही नौसेना में शामिल हो जाएंगे, इसके अतिरिक्त कई नए पोत इस समय निर्माणाधीन हैं।भारत पारंपरिक सबमरीन के अतिरिक्त न्यूक्लियर शक्ति से चलने वाली सबमरीन भी भारतीय शिपयार्डों में बनाई जा रही हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास 180 तेजस जेट बनाने का ऑर्डर है। 155 मिमी की आधुनिक तोप (ATAGS) को भारत में ही विकसित किया गया है और 307 ATAGS बनाने का ऑर्डर स्वदेशी कंपनियों को दिया जा चुका है। 156 स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाने का ऑर्डर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिया जा चुका है।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत सरकार, भारत का विकास, रक्षा मंत्रालय (mod), रक्षा उत्पादों का निर्यात, सैन्य तकनीक, तकनीकी विकास
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भारतीय रक्षा उत्पादन में उछाल, निर्यात भी बढ़ा
भारत के रक्षा उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि इस उत्पादन में सरकार से जुड़े उपक्रमों की 76 प्रतिशत और निजी क्षेत्र के उपक्रमों की 24 प्रतिशत भागीदारी है।
रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह 38424 करोड़ रुपए हो गया है। यह सफलता पिछले दस वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में आयात कम करने के बाद स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिले नए अवसरों के कारण संभव हुई है।
रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के प्रयास 2014 के तुरंत बाद ही प्रारंभ हो गए थे लेकिन 2020 में सैनिक साजोसामान खरीदने के लिए बनाए गए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के नियमों में संसोधन के बाद इसमें गति आई। इन संसोधनों ने निजी क्षेत्रों को सरकारी उपक्रमों के साथ साझेदारी के नए रास्ते खोल दिए साथ ही निजी क्षेत्र के उद्योग अब अपने उत्पाद निर्यात भी करने के लिए स्वतंत्र हो गए।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने उन उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रों की सूची जारी करनी प्रारंभ की जिन्हें अब केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग से ही खरीदा जा सकता था जिसमें अब लगभग 5500 आइटम हो चुके हैं। इससे सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ही तरह के रक्षा उद्योग को भारी लाभ हुआ।
केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग से ही खरीदे जाने वाले उत्पादों में पोत, विमान, तोपों जैसे बड़े और जटिल उपकरण भी हैं।
भारतीय नौसेना के लिए रूस से बनकर आए तलवार क्लास के दो युद्धपोतों के बाद अब कोई भी युद्धपोत विदेश से नहीं खरीदा जाएगा। नौसेना के अलग-अलग शिपयार्डों में बने 5 से अधिक पोत केवल अगले एक महीने में ही नौसेना में शामिल हो जाएंगे, इसके अतिरिक्त कई नए पोत इस समय निर्माणाधीन हैं।
भारत पारंपरिक सबमरीन के अतिरिक्त न्यूक्लियर शक्ति से चलने वाली सबमरीन भी भारतीय शिपयार्डों में बनाई जा रही हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास 180 तेजस जेट बनाने का ऑर्डर है। 155 मिमी की आधुनिक तोप (ATAGS) को भारत में ही विकसित किया गया है और 307 ATAGS बनाने का ऑर्डर स्वदेशी कंपनियों को दिया जा चुका है। 156 स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाने का ऑर्डर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिया जा चुका है।
भारत और रूस के सहयोग से 6.5 लाख से अधिक एक-203 असॉल्ट राइफल भारत में बनाई जा रही हैं। भारत-रूस का साझा उत्पादन सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस का फिलीपींस के बाद अब वियतनाम को निर्यात किया जाएगा। स्वदेशी रक्षा उद्योग इस समय विश्व के अनेक देशों को रॉकेट सिस्टम, तोपें, लड़ाकू वाहन, राइफलें, बुलेटप्रूफ जैकेट, ड्रोन आदि बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है।