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आर्कटिक विकास में भागीदारी के बिना आर्थिक वृद्धि संभव नहीं: रूसी सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री
आर्कटिक विकास में भागीदारी के बिना आर्थिक वृद्धि संभव नहीं: रूसी सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री
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रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री के मुताबिक, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि आर्कटिक के विकास में भागीदारी के बिना मजबूत आर्थिक विकास संभव नहीं है।
2026-10-15T19:20+0530
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रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री एलेक्सी चेकुनकोव ने कहा कि भारत, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व के देशों सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि आर्कटिक के विकास में भागीदारी के बिना उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक वृद्धि हासिल करना संभव नहीं है।उन्होंने बताया कि रूस के आर्कटिक क्षेत्र में 22 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के खनिज संसाधन हैं, जबकि इस क्षेत्र के 20% से भी कम हिस्से में मानवीय पहुंच बन पायी है। उनके मुताबिक, रूसी आर्कटिक का कुल पूंजीकरण 100 ट्रिलियन डॉलर से कम नहीं होने का अनुमान है।उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्कटिक जैसे अपार संभावनाओं और संसाधनों से भरपूर क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के साथ मिलकर काम करना बेहद ज़रूरी है।अंतरराष्ट्रीय मंच ‘रूसी ऊर्जा सप्ताह’ का आयोजन 14 से 16 अक्टूबर तक मास्को में हो रहा है।
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आर्कटिक विकास में भागीदारी के बिना आर्थिक वृद्धि संभव नहीं: रूसी सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री
रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री के मुताबिक, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि आर्कटिक के विकास में भागीदारी के बिना मजबूत आर्थिक विकास संभव नहीं है।
रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री एलेक्सी चेकुनकोव ने कहा कि भारत, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व के देशों सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि आर्कटिक के विकास में भागीदारी के बिना उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक वृद्धि हासिल करना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि
रूस के आर्कटिक क्षेत्र में 22 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के खनिज संसाधन हैं, जबकि इस क्षेत्र के 20% से भी कम हिस्से में मानवीय पहुंच बन पायी है। उनके मुताबिक, रूसी आर्कटिक का कुल पूंजीकरण 100 ट्रिलियन डॉलर से कम नहीं होने का अनुमान है।
रूसी ऊर्जा सप्ताह फोरम के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए चेकुनकोव ने कहा, "चीन, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व के देशों सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि इस वैश्विक परियोजना में भागीदारी के बिना उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक वृद्धि हासिल करना असंभव है।"
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्कटिक जैसे अपार संभावनाओं और
संसाधनों से भरपूर क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के साथ मिलकर काम करना बेहद ज़रूरी है।
चेकुनकोव ने कहा, “हाइड्रोकार्बन, उर्वरक और धातुओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अच्छे अवसर मौजूद हैं। इनमें कीमती धातुएं, रेयर-अर्थ एलिमेंट और तांबे जैसे रणनीतिक कच्चे माल शामिल हैं, जो एनर्जी ट्रांजिशन के लिए आवश्यक हैं। इन अवसरों को एक अनुभवी साझेदार के साथ मिलकर आगे बढ़ाना सबसे बेहतर है।”
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‘रूसी ऊर्जा सप्ताह’ का आयोजन 14 से 16 अक्टूबर तक मास्को में हो रहा है।